यदी हाँ को इकरार समझूँ ,
तो यह शब्द मायूस क्यूँ हैं ??
खुशियों से भरी लकीरों का
तेरा चेहरा भी , मोहताज़ क्यूँ हैं ??
यदी हाँ को इन्कार समझूँ ,
तो यह बेशबब-बेरुखी क्या है ??
तुझसे ना सही ,
खुद से रुशवा हो जायेंगे
इस झूठे ऐतबार पे
वरना ता-उम्र इंतज़ार करते
तेरे इन्कार पे !!!
1 comment:
Tere wade pe jiye hum to yeh jaan jhut janaa, khushi se mar na jate..Agar ayetbar hota ...!!
Ghalib
Post a Comment