Saturday, March 24, 2012

अम्मीं

ईद हो या मोहर्रम ,
हर त्यौहार में अम्मी रोती हैं
और भला रोयें भी न क्यूँ ??

"अनस" बैंगलोर चला गया ,
और " इसरा " भी
कभी-कभी साथ नहीं होती
" तर्र्नुँम " जब भी माइके जाती है
वह छोटी बच्ची "इसरा"
जिसमे अम्मी की अब पूरी जहाँ मौजूद है
वह भी साथ जाती है !!!

साउदी में "उनको" छुट्टियाँ कम मिलती हैं
और अब तो छोटा लड़का भी कहता है
अम्मी मै भी साउदी जाऊंगा !!!!
तो भला अम्मीं क्यूँ न रोयें ??

उन्होंने ही तो अल्लाह से ये दुआ मांगी थी
" शौहर का बड़ा नाम हो ,
सारे बच्चो का एक ख़ुशी संसार हो "
अल्लाह ने तो दुआ कुबूल की
पर दे गए दो आंसू उनकी झोली में
अब हर त्यौहार में अम्मीं रोती हैं !!!!