Saturday, January 1, 2011

Arz hai.....

यदी हाँ को इकरार समझूँ ,
तो यह शब्द मायूस क्यूँ हैं ??
खुशियों से भरी लकीरों का
तेरा चेहरा भी , मोहताज़ क्यूँ हैं ??

यदी हाँ को इन्कार समझूँ ,
तो यह बेशबब-बेरुखी क्या है ??

तुझसे ना सही ,
खुद से रुशवा हो जायेंगे
इस झूठे ऐतबार पे

वरना ता-उम्र इंतज़ार करते
तेरे
इन्कार पे !!!

नया साल मुबारक हो :)

देखिये पाते हैं उस्शाक बुतों से क्या फैज़,

एक ब्रह्मण ने कहा है की यह साल अच्छा है.. :)

Sunday, December 26, 2010

आईना .....

आईना मुझे देख के हैराँ सा गया ,
मेरी आँखों में एक नज़र डाल ,
मैं परेशां हूँ , यह भाँप गया !!!


पहले कभी जब भी मैं आता था ,
आते ही मुस्कुराता था ,
यह देख के आईना भी
नए - नए शक्ल बनाता था
हमें और भी हँसाता था !!!!!

आज जब हम रुसवा हैं इस ज़माने से ,
किसी के आशा से , तो किसी के निराशा से ,
चेहरे पे एक शिकन सी आ गई है ,
बढती उम्र के साथ ,
आखीर क्यों एक फीक्र सी आ गई है ??

इसे देख के आईना हैराँ सा गया ,
मेरी आँखों में एक नज़र डाल ,
मैं परेशां हूँ , यह भाँप गया !!!

उसे आदत थी मेरी मुस्कराहट की ,
कभी हसने की, तो कभी शरमाने की ,

यह देख के आईना भी

कुछ और नहीं तो ,
कीसी पिछली ख़ुशी पे ही मुस्कुरा दो गोया ,
बातों बातों में यह बात वह कह गया ,
खुश होने का एक बहाना बतला गया,

नए-नए शक्ल बना
फ़िर से मुझे हँसाता गया !!!!!!