यूँ सब्द फिंके पड़ जाते हैं ....
जब सुदबुध खो के हम सोचा करते हैं ,
पूरानी यादों को टटोला करते हैं ,
मूंदकर आँखे ज़ब आपको ही देखा करते हैं,
तस्वीर में हम आपकी , खुद को भूल जाते हैं
यादों से जब हम बाहर आते हैं ,
फिर मिलने की जब आस लगाते हैं ,
न जाने कितने सपने, बनकर बिगड़ते हैं
यूँ फिर से जब हम आगे जीते हैं ,
हर बात में आपही को पाते हैं ,
कुछ कहना चाहते हैं..........
पर सब्द फिंके पड़ जाते हैं